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उदासी के साथ नींद बदले तो केवल घंटों को न देखें

मनोदशा गिरी हो तो नींद हमेशा एक ही तरह नहीं बदलती। कोई देर तक जागता है, कोई अलार्म से बहुत पहले उठ जाता है, और कोई ज़्यादा सोकर भी दिन भर थका रहता है। उपयोगी सवाल है कि आपके लिए क्या बदला और क्या नींद और मनोदशा मिलकर अब रोज़ की ज़िंदगी को प्रभावित कर रहे हैं।

पास में सिलाई मशीन वाले साधारण कमरे में भोर में जागकर बैठी थकी भारतीय महिला

नींद के तीन बदलाव, तीन अलग कहानियाँ

एक हफ़्ते के लिए लिखें कब बिस्तर पर गए, लगभग कब नींद आई, रात में या सामान्य से बहुत जल्दी जागे या नहीं, और कब उठे। सामान्य से ज़्यादा सो रहे हों तो वह भी लिखें। NIMH अवसाद के संभावित लक्षणों में नींद न आना, जल्दी जागना और ज़्यादा सोना, तीनों बताता है। इनमें से कोई बात अकेले अवसाद का निदान नहीं करती; एक खराब रात लंबे पैटर्न के बारे में बहुत कम बताती है।

समय के साथ लिखें कि थकान बनी है, पहले पसंद आने वाले कामों में रुचि घटी है, मन उदास या चिड़चिड़ा है, या काम और घर की ज़िम्मेदारियाँ कठिन लग रही हैं। रात की शिफ्ट, शोर, दर्द, दवा या दूसरी बीमारी भी नींद बदल सकती है। डॉक्टर को ये परिस्थितियाँ बताएँ; यह न मानें कि मनोदशा ने ही नींद बदली या नींद ने ही मनोदशा।

अगले दिन की कीमत देखें

रिकॉर्ड में एक पंक्ति और जोड़ें: अगले दिन क्या कठिन हुआ? शायद काम का पहला घंटा छूटा, ध्यान नहीं लगा, दोस्त को जवाब नहीं दे पाए या पसंद का काम अच्छा नहीं लगा। NHS के अनुसार उदासी पर मदद लेते समय रोज़ की ज़िंदगी पर असर भी महत्वपूर्ण है। बिस्तर में बिताए घंटों से ज़्यादा काम की बात है कि आराम महसूस हुआ या नहीं और ज़रूरी काम कर पाए या नहीं।

नोट छोटा रखें; नींद मापने वाला उपकरण या बिल्कुल सटीक डायरी ज़रूरी नहीं। घर साझा है या काम के घंटे बदलते हैं तो वह भी लिखें। उठने का नियमित समय और सोने से पहले अपनी क्षमता के अनुसार शांत दिनचर्या मदद कर सकती है, लेकिन केवल दिनचर्या लगातार गिरी मनोदशा का इलाज नहीं है। उचित बदलावों से भी सुधार न हो तो खुद को दोष न दें।

नींद और मनोदशा, दोनों के लिए मदद लें

मनोदशा लगातार गिरी रहे, नींद की समस्या रोज़ की ज़िंदगी प्रभावित करे या संभालना मुश्किल लगे तो योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य पेशेवर से बात करें। NHS दो सप्ताह से अधिक बनी उदासी पर जाँच की सलाह देता है, लेकिन लक्षण गंभीर या चिंताजनक हों तो उससे पहले भी मदद माँग सकते हैं। छोटा रिकॉर्ड ले जाएँ और पूछें नींद तथा मनोदशा पर और क्या असर कर सकता है; जाँच में अवसाद के साथ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएँ भी देखी जा सकती हैं।

हमारी अवसाद-लक्षण जाँच पिछले दो सप्ताह के बारे में पूछती है और नींद समेत दूसरे लक्षण कितनी बार हुए, यह क्रम में रखने में मदद कर सकती है। वह कम या ज़्यादा नींद की वजह नहीं बताती, अवसाद का निदान नहीं करती और बातचीत का विकल्प नहीं है। खुद को चोट पहुँचाने का विचार हो या अपनी सुरक्षा बनाए रखना मुश्किल हो तो प्रश्नावली पूरी करने का इंतज़ार न करें; तुरंत स्थानीय आपात या मानसिक स्वास्थ्य सहायता लें।

स्रोत: NIMH — Depression · NHS — Symptoms of depression in adults · NHS — Get help with low mood, sadness or depression · NHS Every Mind Matters — Sleep problems

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