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चिंता के कारण नींद नहीं आती: क्या परेशानी सिर्फ़ नींद की है?

कमरा शांत होता है, लेकिन दिमाग़ में बिल, काम और आगे क्या बिगड़ सकता है, यह घूमने लगता है। सवाल सिर्फ़ आज रात किसी तरह सो जाने का नहीं है। देखें, क्या ये विचार केवल बिस्तर पर आते हैं या दिन के कामों पर भी असर डालने लगे हैं।

रात में साधारण कमरे में नोटबुक के पास बैठी चिंतित और थकी भारतीय महिला

रात के साथ दिन को भी देखें

कुछ दिन नोट करें कि चिंता कब शुरू होती है, किस बात की है, ध्यान उससे हटता है या नहीं और सोते समय क्या होता है। क्या दिन में भी तनाव, चिड़चिड़ापन, ध्यान की कठिनाई या काम टालना बढ़ा है? अमेरिकी मानसिक स्वास्थ्य संस्थान NIMH के अनुसार नींद की परेशानी चिंता के बड़े पैटर्न का एक हिस्सा हो सकती है। एक या कुछ बेचैन रातों से चिंता संबंधी बीमारी तय नहीं होती।

नींद खराब होने की दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। NHS शोर, शिफ़्ट, कैफ़ीन, दर्द, दवाओं और सोते समय साँस में रुकावट जैसी बातों पर ध्यान देने को कहता है। तेज़ खर्राटे, हाँफते हुए जागना या दिन में बहुत नींद आना हो तो डॉक्टर को बताएँ; हर खराब रात को केवल चिंता न मानें। नींद और दिन के अनुभव का छोटा रिकॉर्ड किसी नाम का अनुमान लगाने से ज़्यादा काम आता है।

चिंता के लिए सोने से पहले अलग समय रखें

वही विचार रात में घूमते रहें, तो सोने से कुछ समय पहले उन्हें लिखकर देखें। जिस समस्या पर कदम उठाया जा सकता है, उसके आगे अगला छोटा काम लिखें—जैसे कल किसे फ़ोन करना है या कौन-सा काग़ज़ देखना है। जिसे आज हल नहीं कर सकते, यह भी लिख दें। NHS इसे रोज़ का छोटा ‘चिंता का समय’ कहता है: बिस्तर ही सोचने की इकलौती जगह न रहे।

यह प्रयोग है, अच्छी नींद की गारंटी नहीं। संभव हो तो उठने का समय नियमित रखें। देर की चाय-कॉफ़ी, साझा घर का शोर या बदलती ड्यूटी रात को और कठिन बना रही है या नहीं, देखें। घर में जगह कम हो, तो आदर्श कमरे की अपेक्षा नोटबुक और अगला संभव कदम अधिक व्यावहारिक हो सकता है। बहुत नींद आ रही हो तो गाड़ी या ख़तरनाक मशीन न चलाएँ।

कब सलाह, एक और नुस्खे से बेहतर होगी

नींद की कमी से दिनचर्या बिगड़ रही हो, कुछ बदलावों के बाद भी समस्या बनी हो, या चिंता को संभालना कठिन हो और वह काम, घर तथा दिन के दूसरे हिस्सों में भी बनी रहती हो, तो योग्य डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करें। नींद कब नहीं आती और जागते समय क्या बदल रहा है, दोनों बताएँ। मदद से चिंता, नींद की समस्या या दूसरे कारण का मूल्यांकन हो सकता है; यह निर्णय अकेले नहीं करना है।

हमारी चिंता के लक्षणों की जाँच पिछले दो हफ़्तों के बारे में पूछती है। इससे चिंता और जुड़े लक्षण कितनी बार हुए, यह क्रम में रखने में मदद मिल सकती है। वह चिंता का निदान नहीं करती, नींद खराब होने का कारण नहीं बताती और इलाज की जगह नहीं लेती। असुरक्षित महसूस हो या खुद को नुकसान पहुँचाने का विचार आए, तो प्रश्नावली के बजाय तुरंत स्थानीय आपात या मानसिक स्वास्थ्य सहायता लें।

स्रोत: NHS — Tackling your worries · NHS — Insomnia · NIMH — Generalized anxiety disorder

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